शुबह हुई कि छेडने लगा है सूरज मुझको।
क्योंकी अक्सर समय पर समझ नही,
मगर वहाँ तूफान भी हार जाते है.
मैदान में हारा हुआ फिर से जीत सकता है, परंतु
वहां खुद को समझाना लेना बेहतर होता है।
विश्वास पत्थर को भगवान बना सकता है और,
शुबह हुई कि छेडने लगा है सूरज मुझको।
क्योंकी अक्सर समय पर समझ नही,
मगर वहाँ तूफान भी हार जाते है.
मैदान में हारा हुआ फिर से जीत सकता है, परंतु
वहां खुद को समझाना लेना बेहतर होता है।
विश्वास पत्थर को भगवान बना सकता है और,